नई दिल्ली। पिछलों कुछ दिनों से चल रही खींचतान के बाद आखिरकार वॉलमार्ट और भारती के बीच का करार टूट गया है। अब दोनों अलग-अलग कारोबार करेंगे। दरअसल भारत के भारती इंटरप्राइसेज और मल्टी ब्रांड खुदरा करोबार करने वाली प्रमुख अमेरिकी कंपनी वालमार्ट स्टोर्स ने अपने संयुक्त उपक्रम को समाप्त करते हुए अलग-अलग कारोबार करने की घोषणा की है।
इस संबंध में संयुक्त बयान में दोनों कंपनियों ने कहा है कि नियामकों की मंजूरी मिलने पर वॉलमार्ट, भारती वॉलमार्ट प्राइवेट लिमिटेड में से भारती की हिस्सेदारी खरीदेगी और मल्टी ब्रांड थोक कारोबार करने वाली कंपनी बेस्ट प्राइस मोडर्न वोलसेल कैश एंड कैरी मे वॉलमार्ट की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी हो जाएगी।
दरअसल अब वॉलमार्ट सरकार और दूसरे भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर इस कारोबार को बढ़ाएगी और वह देश में मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार मे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए सरकार और दूसरे पक्षों के साथ काम करती रहेगी। संयुक्त उपक्रम समाप्त करने के लिए दोनों कंपनियों के बीच हुए करार के तहत भारती की स्वामित्व वाली सेडार सपोर्ट सर्विस में अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय ऋण-पत्र (सीसीडी) का भारती अधिग्रहण करेगी। भारती रिटेल मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार करने वाले ईजीडे स्टोरों का संचालन जारी रखेगी और इसके विस्तार पर भविष्य में निवेश भी करेगी।
वॉलमार्ट ने कहा है कि संयुक्त उपक्रम से अलग होने के निर्णय से दोनों कंपनियों को लाभ होगा। कैश एंड कैरी कारोबार सहित विभिन्न क्षेत्रों में वॉलमार्ट के भारत में निवेश से आपूर्ति के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा जिससे कंपनी को देश में एफडीआई के तहत मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार करने में मदद मिलेगी। भारती वॉलमार्ट में भारती के 50 प्रतिशत शेयर वॉलमार्ट खरीद लेगी और स्वतंत्र रूप से अपने स्टोर चलाएगी। सरकार ने पिछले साल ही मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दी थी। लेकिन अब तक किसी कंपनी ने इसके तहत निवेश के लिए आवेदन नहीं किया है।
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