नई दिल्ली। भारत स्वीडेन नोबेल मेमोरियल वीक 2013 का सातवां एडिशन यादगार रहा। स्वीडिश व्यवसायों के सहयोग से स्वीडन दूतावास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत-स्वीडेन के बीच व्यापार और सामाजिक मेलमिलाप को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया। इस कार्यक्रम खासकर रवीन्द्र नाथ टैगोर को याद किया गया। टैगोर की रचना गीतांजलि को साहित्य में 2013 का नोबेल पुरस्कार मिला है।
इस कार्यक्रम में टैगोर के उद्देश्य के बारे में लोगों को जागरुक किया गया। स्वीडन के राजदूत हेराल्ड सेंडबर्ग ने कहा कि यह कार्यक्रम आज के समय में टैगोर के काम की प्रासंगिकता दिखाने और आगे भी यह प्रसार करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि टैगोर के बारे में पूरी दुनिया में आज के परिपेक्ष में चर्चा हो रही है। टैगोर के मानवता और समाजिक जीवनशैली का विचार लोगों को भा रहा है। क्योंकि उनका विचार सार्थक था। स्वीडेन के राजदूत ने कहा कि हमें टैगोर के बारे और पढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को टैगोर के अध्ययन से देश की संस्कृति को एक-दूसरे को समझने में सहयोग मिलेगी और लोगों एक-दूसरे के करीब आएंगे। क्योंकि टैगोर महिलाओं के अधिकारों के एक उत्साही समर्थक थे और लगातार उनकी शिक्षा और उत्थान की दिशा में काम किया। इसके लिए हमें उन्हें सलाम करते हैं।
ओरीफ्लेम इंडिया के एमडी निकोलस नाचना ने इस मौके पर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली चंदा गायेन का परिचय करवाया, और चंदा ने अपने अनुभव बांटे। इस मौके Oriflame के ब्रांड एंबेसडर अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे अपने जीवन के बारे में बताई, उन्होंने अपनी उपलब्धियों गिनाई और महिला सशक्तिकरण के बारे में लोगों को बताया। इस मौके पर सोनाली ने कहा कि जब हम एक महिला को शिक्षित करते हैं तो उससे एक परिवार शिक्षित होता है। ओरीफ्लेम के इस कदम का सराहना करती हुईं सोनाली ने कहा कि लड़कियों के शिक्षा के प्रति Oriflame अपना सामाजिक दायित्व को बखूबी निभा रहा है।
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