चिटफंड के मामलों की एक साथ सुनवाई पर विचार
कोलकाता : राज्य में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ किये गये सभी मामलों की एक साथ सुनवाई पर कलकत्ता हाइकोर्ट विचार कर रहा है. कलकत्ता हाइकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर व न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने इस दिशा में संकेत दिये. इधर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य की निजी वित्त संस्थाओं के कामकाज पर चिंता भी प्रकट की.
खंडपीठ ने कहा कि इतने मामले हैं, इसके लिए विशेष बेंच बना कर मामले की सुनवाई की जा सकती है. एमपीएस के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गयी. इधर एमपीएस ने कहा है कि महाराष्ट्र के नागपुर की एक संस्थान उनके 1700 करोड़ रुपये की संपत्ति को गिरवी रख कर उन्हें पैसे देने को राजी है जिसके जरिये निवेशकों को उसका पैसा लौटाया जा सकता है.
इस पर अदालत ने कहा है कि उक्त संस्था के संबंध में जानकारी हासिल करने के बाद ही इस बाबत इजाजत देने पर विचार किया जा सकता है. लिहाजा आगामी सात जुलाई को उक्त संस्था, एब्सोल्यूट फिनांशियल सर्विसेस लिमिटेड, की बाबत कागजात पेश करने के लिए एमपीएस को कहा गया है. अदालत कागजात देखने के बाद ही इस पर फैसला करेगी.
इधर एमपीएस के मुताबिक उसके कुल निवेशकों की तादाद पांच लाख से अधिक है. हाइकोर्ट ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने पर विचार करने की भी बात कही है. इस संबंध में सरकारी वकील प्रणव दत्त ने कहा कि यदि ऐसा हो जाता है तो एमपीएस का मॉडल राज्य के लिए उपयुक्त होगा जहां निवेशकों का पैसा लौटाया जा सकेगा. चिटफंड कंपनियों के मामलों के संबंध में सीबीआइ से अदालत ने कुल मामलों की संख्या पूछी थी.
सीबीआइ ने बताया कि कुल 464 मामले राज्य की सीआइडी के पास हैं. उनमें से 278 मामले सीबीआइ को सौंपे गये हैं. इस पर खंडपीठ ने कहा कि इतने मामलों की सुनवाई और फैसले में तो 100 वर्ष लग जायेंगे. अदालत ने सीबीआइ को परामर्श दिया है कि वह एक कॉमपैक्ट चाजर्शीट दे. इधर अदालत में पैलान और कलकत्ता वेयरहाउस के मामले पर भी सुनवाई हुई. इन सभी मामलों की सुनवाई आगामी सात जुलाई को होगी.
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