जेल से निकले रेनबो चेयरमैन धीरेन रवानी
धनबाद। रेनबो मल्टीस्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन धीरेन रवानी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जस्टिस प्रशांत कुमार की एकल पीठ ने शुक्रवार को 10-10 हजार के दो मुचलकों पर उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
धीरेन शनिवार को जेल से बाहर निकले। जेल गेट पर रेनबो परिवार के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। 23 अगस्त 2014 को बैंक मोड़ पुलिस ने मिठू रोड स्थित कार्यालय से उन्हें गिरफ्तार किया था।
उन पर रिजर्व बैंक से सर्टिफिकेट लिए बगैर कंपनी चलाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने कार्यालय के साथ बैंक खातों को भी सील कर दिया था। प्राथमिकी में बताया गया कि कंपनी संचालन के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सीओआर (सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन) लेना पड़ता है, जो रेनबो ने नहीं लिया था।
इसके बावजूद सोसाइटी चलाई जा रही थी। जेल जाने के बाद उनकी जमानत याचिका निचली अदालत से खारिज हो चुकी थी। हाइकोर्ट में धीरेन की ओर से अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने बहस की।
रेनबो को आरबीआई के सीओआर की जरूरत नहीं : धीरेन
जमानत मिलने के बाद धीरेन ने रेनबो परिवार के प्रमुख सदस्यों के साथ बैठक की। फिर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह इस मामले में फंसाया गया। हाइकोर्ट में पुलिस ने ही रिजर्व बैंक की वह प्रति सुपुर्द की, जिसमें साफ कहा गया है कि आरबीआई के क्षेत्राधिकार में रेनबो मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव नहीं आती।
सोसाइटी केंद्रीय कृषि सहकारिता मंत्रालय से पंजीकृत है। गैर बैंकीय कार्य के लिए आरबीआई किसी को सीआेआर नहीं देता। उनकी गलत गिरफ्तारी रेनबो परिवार के 40 हजार सदस्यों के भविष्य की अनदेखी थी। हाइकोर्ट के फैसले के बाद अंतत: सत्य की ही विजय हुई। इस दौरान वरुण रवानी, विष्णु रवानी, नीलकंठ रवानी, राजीव रंजन रवानी, शंकर रवानी आदि मौजूद थे।
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