नागपुर। श्रीसूर्य समूह के चेयरमैन समीर जोशी की पुलिस हिरासत 28 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। अदालत में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में गुजरात तक घोटाले की तार जुड़े होने की बात कही। वहीं समीर जोशी के खिलाफ शिकायतकर्ताओं की सूची में 40 और नाम जुड़ गए हैं।
नई शिकायतकर्ताओं ने अदालत में समीर जोशी को न्यायिक हिरासत में भेजने का विरोध किया। जांच अधिकारी विष्णु भोये के मुताबिक जोशी के एक बैंक ल़ॉकर में संपत्तियों के कागजात के बारे में पता चला था, लेकिन उसके बारे में अभी तक पूरा खुलासा नहीं हो पाया है।
भोये के मुताबिक जोशी ने कबूल किया है कि 16.72 करोड़ रुपये की उसने 17 संपत्तियों खरीदी है और इसमें उसके कई पार्टनर हैं। जांच अधिकारी के मुताबिक अदालत ने जोशी की रिमांड इसलिए मांगी गई कि इन नामों का सही से पता चल सके। जांच अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने जोशी के 7 जगहों की पॉपर्टी सील कर दी है। जिसमें उनका घर और दफ्तर शामिल हैं।
जांच अधिकारी ने कहा कि जोशी ने अमरावती और चंद्रपुर में दूध और तेल रिफाइनरी यूनिट होने का दावा किया है। इसलिए पुलिस तथ्यों का पता लगाने के लिए इन स्थानों के लिए उसे ले जाना चाहती है। यही नहीं, जोशी ने 44 टूरिस्ट बसें खरीदी थी, जिसमें अधिकतर गुजरात में चल रही है। इसलिए उन्हें गुजरात ले जाना जरूरी है।
पुलिस ने अदालत में बताया इस घोटाले में मुंबई और पुणे में रोज नए खुलासे हो रहे हैं और निवेशक सामने आ रह हैं। वहीं जोशी भी खुद धीरे-धीरे खुलासे करते जा रहे हैं। पुलिस ने कहा कि पिछले हफ्ते ही शिकायकर्ताओं की संख्या 239 से बढ़कर 283 हो गई।
जिसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए समीर जोशी को आगे भी पुलिस हिरासत में सौंपने को तैयार हो गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने दावा किया है कि जोशी ने करीब 5092 निवेशकों से 250 करोड़ रुपये अपनी कंपनी में जमा करवाए। पुलिस ने दावा किया कि कम से कम 100 करोड़ रुपये निवेशकों के नहीं लौटाए गए।
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