नयी दिल्ली, वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम ने केंद्र सरकार से पोंजी स्कीम और प्राइज चिट फंड जैसी योजनाओं से बढ़ रही धोखाधड़ी के बीच सही डाइरेक्ट सेलिंग कंपनियों (डीएससी) और मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनियों (एमएलएमसी) को सुरक्षा देने के लिए राज्य सरकारों और पुलिस के लिए आवश्यक दिशानिर्देश का प्रारूप तैयार करने का आग्रह किया है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लिखे पत्र में एसोचैम ने कहा है कि 20 हजार करोड़ रूपये वाली ऐसी कंपनियां देश के सात करोड़ से अधिक लोगों को अंशकालिक आय के विकल्प मुहैया करा रही लेकिन प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम, बैंकिंग, अधिनियम (पीसीएमसी) 1978 के कुछ प्रावधानों की गलत व्याख्या कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
एसोचैम ने कहा कि ऐसे में एक स्पष्ट कानून बनाये जाने की जरूरत है ताकि पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियों से सही डायरेक्ट सेलिंग बताया जा सके। हालांकि रिजर्व बैंक ने पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियों के मामले में राज्य सरकारों को जागरूक बनाने की कोशिश की है लेकिन पीसीएमसी अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी नहीं रूकी है क्योंकि ये कंपनियां अपने वित्तीय उत्पाद बिना किसी गारंटी के बेचते हैं। एसोचैम ने कहा कि पीसीएमसी अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्राइज चिट फंड और पोंजी स्कीम पर रोक लगाना है लेकिन इनमें और सही डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों और मनी सर्कुलेशन कंपनियों के बीच अंतर करने की फिलहाल कोई पध्दति मौजूद नहीं है। एसोचैम ने कहा कि अधिनियम की गलत व्याख्या की वजह से आंध्र प्रदेश, छत्तीसगड, केरल, महाराष्ट, राजस्थान और तिमलनाडु की प्रशासनिक मशीनरी ओर पुलिस ने सही डीएससी और एमएलएमसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
हालांकि ऐसी कंपनियां मौजूदा कनूनों का पालन करते हुए अपने कारोबार का संचालन कर रही हैं। डायरेक्ट सेलिंग कारोबार से देश के सात करोडों लोगों को रोजगार मिल रहा है जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं इसलिए इन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए।
Source: ranchiexpress
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