हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को कडे तेवर दिखाते हुऐ कहा है कि दिन ब दिन बढ रही चिटफंड कंपनियों की जालसाजी को रोकना कड़ी चुनौती है। साथ ही कोर्ट ने जिले के सभी कलेक्टरो को दिशा निर्देश दिऐ है की इन कंपनियो के खिलाफ उचित कार्यावाही करें। साथ ही यह भी कहा है कि कार्रवाई निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम-2000 का पालन सुनिश्चित करवाते हुए की जाए। इस संबंध में हर हाल मे 14 जुलाई तक रिपोर्ट पेश कर दी जाए।
मुख्य न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर व जस्टिस अजित सिंह की युगलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता बालाघाट निवासी समाजसेवी अखिलेश सिंह राणा की तरफ से अधिवक्ता राजेश चंद ने पक्ष रखा था।
जिला कलेक्टर बैठे है मामले मे आंखे मुंदे
राजेश चंद कोर्ट के समक्ष अपनी दलिल देते हुऐ कहा कि 14 साल पहले निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम लागू हुआ। जिसके तहत इस बाबत कलेक्टर से लाइसेंस लिए बगैर चिटफंड कंपनियों का संचालन नहीं किया जा सकता। चिटफंड कंपनियों को लाइसेंस लेने के अलावा मामले की प्रतिमाह संबधित कार्यालय पर रिपोर्ट भी पेश करनी चाहिए। लेकिन प्रदेश मे चिटफंड संचालक नियमो को ताक पर रखते हुऐ अपना काम कर रहे है। बावजुद इसके जिला कलेक्टर कार्यवाही करते नजर नही आ रहे है।
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