प्रत्येक्ष बिक्री यानि की डायरेक्ट सेलिंग के बाजार मे कुछ चिटफंड कंपनी के संचालको की वजह से आज इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) की साख पर बट्टा सा लग गया है। जिसकी भरपाई डायरेक्ट सेलिंग उद्योग को भारी नुकसान उठा कर करना पड़ रहा है। जबकि साल 2012-13 के वित्त वर्ष मे डायरेक्ट सेलिंग मे 12 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही रही है की साल 2013-14 मे वित्त वर्ष एक समान रह सकता है।
इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) की महासचिव छवि हेमंत के मुताबिक साल 2012-13 के वित्त वर्ष मे डायरेक्ट सेलिंग का उद्योग 7164 करोड़ रुपए था। 2011-12 मे इसका कारोबार 6385 करोड ही था जबकि वित्त वर्ष के साल 2012-13 मे इसका कारोबार 7164 करोड रुपए तक पहुंचा गया है।
जिसमे कि विशेष रुप से केरल जैसे अन्य छोटे राज्यो मे चल रहे चिटफंड के खेल से इसके निवेशको को खासा नुकसान उठाना पडा, जिसके बाद उनका विशवास भी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों से उठ गया था जिसके वित्त वर्ष धीरे धीरे नीचे की ओर गिरता चला गया। हालांकि विशेष रूप से केरल में नियामक बाधाओं के चलते कुल राजस्व 2012-13 में दक्षिणी क्षेत्र की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2011-12 में 38 प्रतिशत थी। इसलिए साल 2012-13 मे 20 फीसदी की बढोतरी के साथ उद्योग द्धारा जमा कराया गया कुल टैक्स 987 करोड़ रुपए था।
उत्तरी क्षेत्र से कारोबार मे 33 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 1,934 करोड़ के करीब थी जिससे कि राजस्व मे खासा योगदान मिला। जबकि दक्षिणी क्षेत्र मे कारोबार मे 30 फीसदी तक नीचे गिर गया।
दक्षिणी क्षेत्र मे चल रहे चिटफंड संचालको के धोखे से निवेशको ने धीरे धीरे निवेश करना बहुत कम कर दिया था जिसका खामियाजा प्रत्यक्ष बिक्री के उद्योग मे देखने को मिला है। फिलहाल वाणिज्य और उद्योग पीएचडी चैंबर्स ने हाल ही मे एक रिपोर्ट मे आशंका जताई है कि साल 2014-15 मे प्रत्यक्ष बिक्री का व्यापार बढकर 10,843 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। मामले मे चैंबर्स ने मोजूदा रुझानो को देखते हुऐ कहा है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि आने वाले सालो मे प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग मे 20 प्रतिशत की वार्षिक औसत दर से विकसित करने के लिए कार्य जारी रहेगा।
IDSA के अध्यक्ष अमरनाथ सेन गुप्ता ने कहा है कि आईडीएसए ने लोगो के स्व रोजगार के लिए पुरे भारतवर्ष मे 6 लाख वितरको को प्रत्यक्ष बिक्री कंपनियो के साथ जोडा है जिसमे की 60 प्रतिशत महिलाऐं शामिल हैं।
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