उलझे विवादों की एक श्रृंखला के बाद भारत में 7,000 करोड़ रुपये के direct selling बाजार है, उपभोक्ता वस्तुओं के प्रमुख Hindustan Unilever (HUL) ने अपने network marketing division की रणनीति पर फिर से विचार करने का फैसला लिया है।
HUL ने देश में लगभग एक दशक 2003 से direct selling उद्यम शुरू किया। और चैनल के माध्यम से तीन प्रमुख ब्रांडों को बेचते है, Aviance (personal care), Ayush (Healthcare) and Lever Home (Home and oral care)
HUL के चेयरमैन Harish Manwani ने कंपनी की 2013-14 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि, यह वर्ष direct selling उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण गया। इसकी वजह भारत में direct selling के लिए स्वीकार्य मानदंडों पर अस्पष्टता है। साथ ही उन्होंने कहा कि HUL हमेशा भारतीय कानून के ढांचे के भीतर ही अपने व्यापार का आयोजन करता है और हाल ही में और अधिक प्रतिस्पर्धी होने के लिए अपने compensation plan को फिर से शुरू किया है। हम इस कारोबार के लिए रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं।
HUL के एक प्रवक्ता ने कहा कि 2011 में कंपनी ने इसे बनाने का इरादा रखा था हालांकि परिवर्तन नहीं समझाया था। HUL ने compensation plan मे कुछ परिवर्तन किऐ जिसमे HUL ने अपने सदस्यों या बिक्री प्रतिनिधियों के लिए entry fee और renewal fee को हटा दिया था ताकि उनके व्यापार को आसानी से ला सके। HULN एक जिम्मेदार और पारदर्शी ढंग से direct selling व्यापार मॉडल के संचालन के मामले में सबसे आगे रहा है। साथ ही सभी कानूनों के अनुसार ऐसे ही काम करना जारी रहेगा।
Indian Direct Selling Association की महासचिव Chavi Hemanth ने कहा कि PCMCS ACT Direct Selling उद्योग के लिए एक बड़ी बाधा है और इसका जल्द से जल्द संशोधन किया जाना चाहिए।
अधिनियम उस समय लागू किया गया था जब भारत में कोई direct selling कंपनियाँ नही थी। ये अधिनियम उद्योगो के लिए हानिकारक है और साथ ही भारत कई अंतरराष्ट्रीय direct selling कंपनियों से भारी निवेश खो रही है।
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