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अब कंपनियों के नाम को लेकर नहीं चलेगी चतुराई

By Ak Sharma | Published on 15/12/2013

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नई दिल्ली। एक मशहूर कहावत है कि ‘नाम में क्या रखा है’ लेकिन कंपनियों के लिए असलियत यही है कि नाम में छुपा बड़ा खेल है। बड़ी और चर्चित कंपनियों की ब्रांड वैल्यू का अनुचित लाभ उठाने के लिए मिलते-जुलते नाम से कंपनी शुरू करने की चतुराई अब नहीं चल पाएगी। कंपनियों की इन चालबाजियों पर बंदिश लगाने का प्रावधान नए कंपनी कानून में किया गया है। यह कानून संसद से पास हो चुका है। इसपर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने और इसकी अधिसूचना जारी होनी बाकी है।

नए कंपनी कानून में इसके लिए दिशा-निर्देश तय किए हैं। अब तक इसके लिए नियमों के अभाव में आलम यह था कि आइकिया, वॉलमार्ट और स्टारबक्स जैसी तमाम दिग्गज और प्रतिष्ठित कंपनियों के नामों से मिलते-जुलते नामों से कंपनियां शुरू की जा रही थीं। नए नियमों के तहत अब ऐसी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा। नाम रजिस्टर कराने के लिए कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि उनका नाम किसी दूसरी कंपनी से मिलता-जुलता न हो। साथ ही कुछ सरकारी इकाइयों को छोड़कर कंपनियों के नाम में किसी देश या राज्य के नाम को नहीं जोड़ा जा सकेगा।

ब्रिटिश इंडिया जैसे शब्दों और किसी दुश्मन देश के नाम का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित किया गया है। कंपनी के नाम में संक्षिप्त रूपों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकेगा। प्रमोटरों के नामों के पहले अक्षरों को मिलाकर कंपनी का नाम रखने के चलन को रोकने के लिए यह नियम बनाया गया है। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने उदाहरण देते हुए बताया है कि यदि बीएमसीडी लिमिटेड का नाम उसके प्रमोटरों भरत, महेश, चंदन और डेविड के नाम के पहले अक्षरों को मिलाकर रखा गया है तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब एबीसी लिमिटेड, 23के लिमिटेड और डीजेएमओ लिमिटेड जैसे नामों को पंजीकृत नहीं किया जाएगा। ऐसी कंपनियां जो अपने मूल नाम से ज्यादा संक्षिप्त नाम से पहचानी जाती हैं, वह कंपनी नए कानून के तहत संक्षिप्त रूप को ही अपना प्रमुख नाम बना सकती हैं। इसके अलावा मंत्रालय ने ऐसे शब्दों की सूची तैयार की है जिनका इस्तेमाल केंद्र सरकार की इजाजत के बिना नहीं किया जा सकेगा।

इस सूची में बोर्ड, कमीशन, अथॉरिटी, अंडरटेकिंग, नेशनल यूनियन, सेंट्रल, फेडरल, रिपब्लिक, प्रेसीडेंट, स्मॉल इंडस्ट्रीज और डेवलपमेंट अथॉरिटी जैसे कई शब्द शामिल हैं। इसके अलावा बीमा, बैंक, स्टॉक एक्सचेंज, वेंचर कैपिटल, असेट मैनेजमेंट, निधि और म्युचुअल फंड जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से पहले आवेदकों को इस बात का घोषणा पत्र देना होगा कि कंपनी इन नामों से जुड़े सभी नियमों को पूरा करती है। स्टेट शब्द का इस्तमाल केवल सरकारी कंपनियां कर सकेंगी। केवल किसी महाद्वीप, देश, राज्य या शहर के नाम जैसे एशिया लिमिटेड या हरियाणा लिमिटेड को कंपनी नाम बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कॉटन टेक्सटाइल मिल्स लिमिटेड या सिल्क मैन्यूफैक्चरिंग लिमिटेड जैसे नामों को भी पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

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Filed Under: MLM समाचार Tagged With: Bill Pass, Council, Parliament, Private Company, Registration  

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