चाणक्य ने कहा है कि मुर्खो से मुर्ख जैसी ही भाषा बोलनी चाहिए,क्योंकी उसको उसी की ही जुबान मे समझ मे आएगा कि सामने वाला क्या बोलना चाहता है और किस विषय पर बोल रहा है। ऐसा करने से मुर्ख व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है।
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