शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में करीब एक दर्जन ‘बाइक बोट‘ के स्थानों पर तलाशी ली। नोएडा की ‘बाइक बोट‘ फर्म के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के मामले में एक पोंजी घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। ‘बाइक बोट‘ मामले के सिलसिले में दिल्ली, नोएडा और लखनऊ में करीब 12 परिसरों में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत छापे मारे जा रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इस खोज का उद्देश्य अतिरिक्त सबूत और दस्तावेज इकट्ठा करना है, ताकि ‘बाइक बोट‘ मामले में जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

ग्रेटर नोएडा की बाइक बोट टैक्सी सेवा पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों के 2.25 लाख निवेशकों से 3000 से 4000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। बाइक बोट कंपनी के प्रमुख संजय भाटी सहित एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को नोएडा पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। मामले में वांछित कुछ अन्य लोग फरार हैं।
कैसे ठगी करती थी बाइक बोट कंपनी
ग्रेटर नोएडा में Garvit Innovative Promoters Limited (GIPL) कंपनी मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम “बाइक बॉट” के साथ सामने आई थी और निवेशकों को एक साल में दोगुना रिटर्न देने का वादा भी किया।
कंपनी मोटरसाइकिल टैक्सी के लिए निवेश में 62,100 रुपये की मांग किया करती थी और केवल एक वर्ष में निवेश राशि को दोगुना करने के अलावा मासिक रिटर्न का आश्वासन दिया करती थी, लेकिन पुलिस के अनुसार, वादे को पूरा करने में विफल रही।
अधिकारियों ने कहा कि बाइक बोट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों में चल रही थी, जबकि इसका नेटवर्क राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में भी सक्रिय था।
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