देश की आर्थिक स्थिति में सुधार व व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक सेवा विभाग ने कुछ आर्थिक कानूनों व नियमों को गैर आपराधिक घोषित करने का मन बनाया है। इसके लिए सभी संबंधित संस्थाओं व जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं।
इसी कड़ी में फेडरेशन ऑफ इंडियन डायरेक्ट सेल्लिंग इंडस्ट्री (फिडसी), जो कि मंझोले डायरेक्ट सेल्लिंग कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने सरकार के इस आमंत्रण का जवाब देने में देरी किए बिना सरकार का ध्यान प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन (बैंनिंग) एक्ट की धारा 4 की ओर खींचा है। इसके अंतर्गत बहुत बार व्यवसायियों के विरुद्ध दुर्भावनावश निराधार आपराधिक कार्यवाही भी कर दी जाती है। लिहाजा इस धारा में संशोधन करके उनको इससे अलग रखा जाए।
ज्ञातव्य हो कि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइन्स, 2016 को अधिसूचित किया था। तभी से यह अनिवार्य है कि कानूनी व नैतिक रूप से डायरेक्ट सेल्लिंग व्यवसायिओं को इन गाइडलाइन्स के परिपालन संबंधी घोषणा विभाग के पास जमा करानी होगी। किंतु कुछ अभियोजक कानून की गलत व्याख्या कर विधिक डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों पर अभियोजन चला रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने डायरेक्ट सेलिंग को विधिक खुदरा व्यवसाय मानते हुए इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 में मान्यता दे दी है और उपभोक्ता संरक्षण (डायरेक्ट सेल्लिंग) नियमावली, 2019 को लाने की तैयारी भी कर ली है।
फिडसी ने राज्यों की राजधानियों में आयोजित सम्मेलनों में डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइन्स का प्रचार प्रसार कर के एक सराहनीय कार्य किया है और अब तक 13 राज्यों ने इन गाइडलाइंस को अधिसूचित कर दिया है। यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि राष्ट्रीय लॉकडाउन में जब पूरे देश का व्यापार ठप हो गया था तब भी डायरेक्ट सेल्लिंग उद्योग ने ऑनलाइन व डिजिटल माध्यमों को अपनाते हुए अपना व्यापार न केवल जारी रखा अपितु इसमें वृद्धि करते हुए उन लाखों नवयुवकों एवं नवयुवतियों को रोजगार भी उपलब्ध करवाया जो कि अन्य व्यापारों के ठप होने से बेरोजगार हो गए थे।
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