
अनियमित जीवनशैली तथा उठने-बैठने के गलत तरीकों के कारण कम उम्र में ही कमरदर्द या साइटिका की समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल साइटिका खुद में बीमारी नहीं बल्कि बीमारियों के लक्षण हैं।कमरदर्द या साइटिका से परेशान हैं तो कुछ मिनटों तक नियमित रूप से अर्ध शलभासन करें। यह आसन करने से कमर दर्द में आराम मिलता है। मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसका प्रमुख लक्षण तब सामने आता है जब पीठ और पैर में दर्द होने लगे। यह दर्द ऐंठन या अकड़न के कारण भी हो सकता है।
अर्ध शलभासन की विधि
समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। पेट के बल लेटकर सबसे पहले ठोड़ी को भूमि पर टिकाएं। फिर दोनों हाथों को जांघों के नीचे दबाएं। श्वास अन्दर लेकर एक पैर को ऊपर उठाएं। पैर को और ऊपर उठाने के लिए हाथों की हथेलियों से जांघों को दबाएं। वापस आने के लिए धीरे-धीर पैर को भूमि पर ले आए। फिर हाथों को जांघों के नीचे से निकालते हुए मकरासन की स्थिति में लेट जाएं।
अर्ध शलभासन की सावधानी
घुटने से पैर नहीं मुडऩा चाहिए। ठोड़ी भूमि पर टिकी रहे। 10 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें। जिन्हें मेरुदण्ड, पैरों या जांघों में कोई गंभीर बीमारी हो या परेशानियों हो तो वह योग चिकित्सक से सलाह लेकर ही यह आसन करें।
अर्ध शलभासन के लाभ
मेरुदण्ड के नीचे वाले भाग में होने वाले सभी रोगों को दूर करता है। कमर दर्द एवं सायटिका दर्द के लिए विशेष लाभप्रद है। मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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