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RBI लगाए बैठी है आस, नई सरकार से इकॉनमी मे अच्छे दिन की

RBI लगाए बैठी है आस, नई सरकार से इकॉनमी मे अच्छे दिन की

By Mahender Singh | Published on 27/06/2014

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एनडीए की सरकार से तकरीबन सभी एक ही आस लगाऐं बैठे की मोदी सरकार आने से अचछे दिन आने वाले है शायद भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डा. रधु राम राजन को भी यही लग रहा था कि मोदी सरकार आने के बाद भारत जिन आर्थिक तंगी का सामना कर रहा उसे कुछ हद तक काबू मे कर लिया जाएगा। जिससे भारत का वित्तीय क्षेत्र भी मजबूती की ओर बढ़ेगा।

इससे भारत का फाइनैंशल सेक्टर मजबूत होगा, जिसके चलते डिफॉल्ट के मामले बढ़ने से और अधिक खराब होती  जा रही है। जिस पर RBI का कहना है कि बड़ी कंपनियों के ट्रेजरी ऑपरेशंस यानी की कैश बॉन्ड मार्केट में लगाने से कई फैसलों को वैसा असर नहीं होता है, जैसा कि होना चाहिए।
अभी तक के शेयर बाजार मे कैश सेग्मेंट की तुलना में डेरिवेटिव मार्केट में वॉल्यूम बहुत ज्यादा होने के कारण चिंता का विषय बना हुआ है। आरबीआई ने अपनी छमाई वित्तीए-स्टेबिलिटी रिपोर्ट जारी करते हुऐ कहा है कि, अभी आरबीआई को इंश्योरेंस इंडस्ट्री क्षेत्र मे लोन देने मे भी दिक्कत है। वह मामले मे इन सभी बातो पर पैनी नज़र रखेगा। बैंक का मानना है कि इससे वित्तीय सिस्टम मे मजबूती आएगी।

आरबीआई के कहने के मुताबिक बैंकिगं सिस्टम मे क्राइसिस आने की वजह से भी परेशानी ती है। इन सबके बावजूद भी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) ऐसी परेशानियों को सहन कर जाती है। जिसकी वजह से एनबीएफसी का कैपिटल रिजर्व अधिक है। राजन ने यह सब इस रिपोर्ट मे साफ शब्दो मे फॉरवर्ड में लिखा है।

सभी फाइनेंनशियल कंपनी मोदी सरकार से निर्णायक फैसले की आस लगाऐं बैठी है। साथ ही इस पॉलिसी को लागू होते हुए भी देखना चाहती है। सरकारी घाटे में कमी, टैक्स और दूसरी पॉलिसी के स्टेबल होने और महंगाई कम होने से देश की मैक्रो-इकनॉमिक और फाइनैंशल स्टेबिलिटी मे भी बढ़ावा आएगा।
2008 में ग्लोबल फाइनैंशल क्राइसिस आने के बाद से आरबीआई ने स्ट्रेस टेस्ट भी शुरू किया था। जिसके बाद से ही रिजर्व बैंक पहली बार खुलकर सामने आया और स्थाई सरकार से फाइनैंशल सिस्टम मे मजबूती लाने के लिए कहा है।

साथ ही राजन ने कहा है कि नई सरकार के आने से आर्थिक नुकसान की भरपाई की थोडी उम्मीद सी बढ़ गई है। हालांकि कुछ सामानों की सप्लाई कम होने की वजह से दाम जरुर बढ़े हैं। इसमे सुधार लाने की आवशयकता हैं। ऐसा करने से आरबीआई की महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिशें मजबूत होंगी साथ ही पॉलिसी लागू करने से इंवेस्टमेंट साइकल शुरू करने में भी मदद मिलेगी।

अगर आपके पास भी मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) से जुडी कुछ जानकारी है या फिर आप विचार शेयर करना हैं तो कमेंट बाक्स मे जाकर कमेंट कर सकतें हैं।

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Filed Under: विशेष समाचार Tagged With: Derivatives market, Economic PROBLEMS, Financial Sector, Financial Stability, MACRO Economic, Modi government, Non - banking finance companies NBFC, RBI News  

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